शांभवी पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी आनंद स्वरूप जी महाराज वर्तमान आर्यावर्त नहीं अपितु निखिल विश्व के हिन्दू समाज के हृदय की पीड़ा को व्यक्त करने का माधयम बने हुए हैं। जब जहां कहीं भी शोषित हिन्दू समाज को शोषण से मुक्त कराने की बात आई, स्वामी जी सदैव अग्रिम पक्ति में खड़े रहे। सनातन वैदिक हिन्दू धर्म को पुनर्स्थापित करने वाले भगवान आदि शंकराचार्य जी के परंपरा को आगे बढ़ाने वाले स्वामी जी ने हिन्दुस्थान को पुनः हिन्दू राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का संकल्प लिया है। दूरदर्शी महाराज जी ने अपने संकल्प को सिद्ध करने हेतु 2012 ईस्वी में हिन्दुत्व के सर्वाधिक संकटग्रस्त भूमि केरल को अपना कर्म भूमि बनाया और कोकोनट आर्मी की स्थापना की जिसका मुख्य उद्देश्य धर्मातरण को रोकना था। महाराज जी अपने उद्देश्य में एक सीमा तक सफल रहे। चूंकि महाराज जी अंग्रेजों के विरुद्ध प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के महानायक हुतात्मा मंगल पाण्डेय के वंश है और क्रांतिकारी स्वभाव आपकी धमनियों में जन्म से विद्यमान है इसलिए महाराज जी ने एक सशस्त्र सैन्य बल की कल्पना की। भारत माता के अमर सपूत बलिदानी मंगल पाण्डेय के सैन्य दल का नाम काली पलटन से प्रेरणा लेते हुए महाराज जी ने अपने प्रस्तावित हिन्दू सशस्त्र बल का नाम काली सेना रखा और उसके सांगठनिक ढांचा को आकार दिया। अजनाभवर्ष की सात पूरियों के दृष्टिगत काली सेना को सात कमानें में विभक्त किया गया है जिसका एक केंद्रीय एकीकृत मुख्यालय है। प्रत्येक कमान में भारतीय सेना से अवकाश प्राप्त सैन्य जवानों और अधिकारियों की सेवाएं ली जाती हैं जिसका लाभ काली सेना को प्राप्त हो सके। काली सेना का मुख्य उद्देश्य भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना है। हिन्दू राष्ट्र के मार्ग में आने वाली प्रत्येक बाधा का दमन करना काली सेना का दूसरा उद्देश्य है। लव जेहाद अर्थात हिन्दू कन्याओं को फंसाकर बच्चे पैदा कर छोड़ देना या काट।
भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए, लव जेहाद, लैंड जेहाद, जनसंख्या जेहाद, थूक और मूत्र जेहाद से मुक्ति के लिए काली सेना का सदस्य बनिए। आइए मिलकर एक मजबूत हिंदू राष्ट्र भारत का निर्माण करते हैं।
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